महाभारत 6.12.19
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
सर्वेष्वेव महाप्राज्ञ द्वीपेषु कुरुनन्दनगौरः कृष्णश्च वर्णौ द्वौ तयोर्वर्णान्तरं नृप
sarveṣveva mahāprājña dvīpeṣu kurunandanagauraḥ kṛṣṇaśca varṇau dvau tayorvarṇāntaraṃ nṛpa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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