महाभारत 6.12.2
समुद्रस्य प्रमाणं च सम्यगच्छिद्रदर्शनशाकद्वीपं च मे ब्रूहि कुशद्वीपं च संजय
samudrasya pramāṇaṃ ca samyagacchidradarśanaśākadvīpaṃ ca me brūhi kuśadvīpaṃ ca saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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