महाभारत 6.15.39
यस्मिञ्जाते महावीर्ये शंतनुर्लोकशंकरेशोकं दुःखं च दैन्यं च प्राजहात्पुत्रलक्ष्मणि
yasmiñjāte mahāvīrye śaṃtanurlokaśaṃkareśokaṃ duḥkhaṃ ca dainyaṃ ca prājahātputralakṣmaṇi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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