महाभारत 6.15.52
अगाधे सलिले मग्नां नावं दृष्ट्वेव पारगाःभीष्मे हते भृशं दुःखान्मन्ये शोचन्ति पुत्रकाः
agādhe salile magnāṃ nāvaṃ dṛṣṭveva pāragāḥbhīṣme hate bhṛśaṃ duḥkhānmanye śocanti putrakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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