महाभारत 6.15.5
के तं यान्तमनुप्रेयुः के चास्यासन्पुरोगमाःकेऽतिष्ठन्के न्यवर्तन्त केऽभ्यवर्तन्त संजय
ke taṃ yāntamanupreyuḥ ke cāsyāsanpurogamāḥke'tiṣṭhanke nyavartanta ke'bhyavartanta saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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