Loading
महाभारत 6.15.64
कथं युक्तान्यनीकानि कथं युद्धं महात्मभिःकथं वा निहतो भीष्मः पिता संजय मे परैः
kathaṃ yuktānyanīkāni kathaṃ yuddhaṃ mahātmabhiḥkathaṃ vā nihato bhīṣmaḥ pitā saṃjaya me paraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें