महाभारत 6.15.6
के शूरा रथशार्दूलमच्युतं क्षत्रियर्षभम्रथानीकं गाहमानं सहसा पृष्ठतोऽन्वयुः
ke śūrā rathaśārdūlamacyutaṃ kṣatriyarṣabhamrathānīkaṃ gāhamānaṃ sahasā pṛṣṭhato'nvayuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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