महाभारत 6.16.25
तत्र नागा रथाश्चैव जाम्बूनदपरिष्कृताःविभ्राजमाना दृश्यन्ते मेघा इव सविद्युतः
tatra nāgā rathāścaiva jāmbūnadapariṣkṛtāḥvibhrājamānā dṛśyante meghā iva savidyutaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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