महाभारत 6.16.35
दशैते पुरुषव्याघ्राः शूराः परिघबाहवःअक्षौहिणीनां पतयो यज्वानो भूरिदक्षिणाः
daśaite puruṣavyāghrāḥ śūrāḥ parighabāhavaḥakṣauhiṇīnāṃ patayo yajvāno bhūridakṣiṇāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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