महाभारत 6.16.44
एकादशैताः श्रीजुष्टा वाहिन्यस्तव भारतपाण्डवानां तथा सप्त महापुरुषपालिताः
ekādaśaitāḥ śrījuṣṭā vāhinyastava bhāratapāṇḍavānāṃ tathā sapta mahāpuruṣapālitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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