महाभारत 6.17.15
श्वेतैश्छत्रैः पताकाभिर्ध्वजवारणवाजिभिःतान्यनीकान्यशोभन्त रथैरथ पदातिभिः
śvetaiśchatraiḥ patākābhirdhvajavāraṇavājibhiḥtānyanīkānyaśobhanta rathairatha padātibhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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