महाभारत 6.18.7
स्वेषां चैव परेषां च समदृश्यन्त भारतमहेन्द्रकेतवः शुभ्रा महेन्द्रसदनेष्विव
sveṣāṃ caiva pareṣāṃ ca samadṛśyanta bhāratamahendraketavaḥ śubhrā mahendrasadaneṣviva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें