महाभारत 6.19.25
अक्षौहिण्या च पाञ्चाल्यो यज्ञसेनो महामनाःविराटमन्वयात्पश्चात्पाण्डवार्थे पराक्रमी
akṣauhiṇyā ca pāñcālyo yajñaseno mahāmanāḥvirāṭamanvayātpaścātpāṇḍavārthe parākramī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें