महाभारत 6.20.18
अव्यूहन्मानुषं व्यूहं दैवं गान्धर्वमासुरम्दिवसे दिवसे प्राप्ते भीष्मः शांतनवोऽग्रणीः
avyūhanmānuṣaṃ vyūhaṃ daivaṃ gāndharvamāsuramdivase divase prāpte bhīṣmaḥ śāṃtanavo'graṇīḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें