महाभारत 6.21.2
व्यूहं भीष्मेण चाभेद्यं कल्पितं प्रेक्ष्य पाण्डवःअभेद्यमिव संप्रेक्ष्य विषण्णोऽर्जुनमब्रवीत्
vyūhaṃ bhīṣmeṇa cābhedyaṃ kalpitaṃ prekṣya pāṇḍavaḥabhedyamiva saṃprekṣya viṣaṇṇo'rjunamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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