महाभारत 6.21.8
तत्तु ते कारणं राजन्प्रवक्ष्याम्यनसूयवेनारदस्तमृषिर्वेद भीष्मद्रोणौ च पाण्डव
tattu te kāraṇaṃ rājanpravakṣyāmyanasūyavenāradastamṛṣirveda bhīṣmadroṇau ca pāṇḍava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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