महाभारत 6.23.27
श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपितान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान्
śvaśurānsuhṛdaścaiva senayorubhayorapitānsamīkṣya sa kaunteyaḥ sarvānbandhūnavasthitān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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