महाभारत 6.23.32
न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि चकिं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा
na kāṅkṣe vijayaṃ kṛṣṇa na ca rājyaṃ sukhāni cakiṃ no rājyena govinda kiṃ bhogairjīvitena vā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें