महाभारत 6.23.35
एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदनअपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते
etānna hantumicchāmi ghnato'pi madhusūdanaapi trailokyarājyasya hetoḥ kiṃ nu mahīkṛte
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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