महाभारत 6.23.41
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियःस्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः
adharmābhibhavātkṛṣṇa praduṣyanti kulastriyaḥstrīṣu duṣṭāsu vārṣṇeya jāyate varṇasaṃkaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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