महाभारत 6.24.13
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरातथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति
dehino'sminyathā dehe kaumāraṃ yauvanaṃ jarātathā dehāntaraprāptirdhīrastatra na muhyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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