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महाभारत 6.24.54
अर्जुन उवाच · arjuna uvāca
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशवस्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम्
sthitaprajñasya kā bhāṣā samādhisthasya keśavasthitadhīḥ kiṃ prabhāṣeta kimāsīta vrajeta kim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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