महाभारत 6.25.21यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनःस यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्ततेyadyadācarati śreṣṭhastattadevetaro janaḥsa yatpramāṇaṃ kurute lokastadanuvartateइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें