महाभारत 6.25.2
व्यामिश्रेणैव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मेतदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम्
vyāmiśreṇaiva vākyena buddhiṃ mohayasīva metadekaṃ vada niścitya yena śreyo'hamāpnuyām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें