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महाभारत 6.25.3
श्रीभगवानुवाचलोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघज्ञानयोगेन सांख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम्
śrībhagavānuvācaloke'smindvividhā niṣṭhā purā proktā mayānaghajñānayogena sāṃkhyānāṃ karmayogena yoginām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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