महाभारत 6.25.41
तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभपाप्मानं प्रजहिह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम्
tasmāttvamindriyāṇyādau niyamya bharatarṣabhapāpmānaṃ prajahihyenaṃ jñānavijñānanāśanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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