महाभारत 6.25.43
एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मनाजहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम्
evaṃ buddheḥ paraṃ buddhvā saṃstabhyātmānamātmanājahi śatruṃ mahābāho kāmarūpaṃ durāsadam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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