महाभारत 6.26.3
स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनःभक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम्
sa evāyaṃ mayā te'dya yogaḥ proktaḥ purātanaḥbhakto'si me sakhā ceti rahasyaṃ hyetaduttamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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