महाभारत 6.26.4
अर्जुन उवाच · arjuna uvāca
अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतःकथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति
aparaṃ bhavato janma paraṃ janma vivasvataḥkathametadvijānīyāṃ tvamādau proktavāniti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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