महाभारत 6.27.2
श्रीभगवानुवाचसंन्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौतयोस्तु कर्मसंन्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते
śrībhagavānuvācasaṃnyāsaḥ karmayogaśca niḥśreyasakarāvubhautayostu karmasaṃnyāsātkarmayogo viśiṣyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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