महाभारत 6.28.13
समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरःसंप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन्
samaṃ kāyaśirogrīvaṃ dhārayannacalaṃ sthiraḥsaṃprekṣya nāsikāgraṃ svaṃ diśaścānavalokayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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