महाभारत 6.28.39
एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतःत्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते
etanme saṃśayaṃ kṛṣṇa chettumarhasyaśeṣataḥtvadanyaḥ saṃśayasyāsya chettā na hyupapadyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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