महाभारत 6.28.42अथ वा योगिनामेव कुले भवति धीमताम्एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्atha vā yogināmeva kule bhavati dhīmatāmetaddhi durlabhataraṃ loke janma yadīdṛśamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें