Loading
महाभारत 6.3.39
धूमायन्ते ध्वजा राज्ञां कम्पमाना मुहुर्मुहुःमुञ्चन्त्यङ्गारवर्षाणि भेर्योऽथ पटहास्तथा
dhūmāyante dhvajā rājñāṃ kampamānā muhurmuhuḥmuñcantyaṅgāravarṣāṇi bheryo'tha paṭahāstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें