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महाभारत 6.3.46
इह कीर्तिं परे लोके दीर्घकालं महत्सुखम्प्राप्स्यन्ति पुरुषव्याघ्राः प्राणांस्त्यक्त्वा महाहवे
iha kīrtiṃ pare loke dīrghakālaṃ mahatsukhamprāpsyanti puruṣavyāghrāḥ prāṇāṃstyaktvā mahāhave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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