महाभारत 6.30.17
सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुःरात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः
sahasrayugaparyantamaharyadbrahmaṇo viduḥrātriṃ yugasahasrāntāṃ te'horātravido janāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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