महाभारत 6.32.11तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमःनाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वताteṣāmevānukampārthamahamajñānajaṃ tamaḥnāśayāmyātmabhāvastho jñānadīpena bhāsvatāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें