महाभारत 6.32.13
आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथाअसितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे
āhustvāmṛṣayaḥ sarve devarṣirnāradastathāasito devalo vyāsaḥ svayaṃ caiva bravīṣi me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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