महाभारत 6.32.3
यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम्असंमूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते
yo māmajamanādiṃ ca vetti lokamaheśvaramasaṃmūḍhaḥ sa martyeṣu sarvapāpaiḥ pramucyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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