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महाभारत 6.33.35
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य; कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटीनमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं; सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य
etacchrutvā vacanaṃ keśavasya; kṛtāñjalirvepamānaḥ kirīṭīnamaskṛtvā bhūya evāha kṛṣṇaṃ; sagadgadaṃ bhītabhītaḥ praṇamya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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