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महाभारत 6.33.9
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिःदर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम्
evamuktvā tato rājanmahāyogeśvaro hariḥdarśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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