महाभारत 6.36.5
सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसंभवाःनिबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम्
sattvaṃ rajastama iti guṇāḥ prakṛtisaṃbhavāḥnibadhnanti mahābāho dehe dehinamavyayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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