महाभारत 6.37.12
यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम्यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम्
yadādityagataṃ tejo jagadbhāsayate'khilamyaccandramasi yaccāgnau tattejo viddhi māmakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें