महाभारत 6.38.4
दम्भो दर्पोऽतिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव चअज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ संपदमासुरीम्
dambho darpo'timānaśca krodhaḥ pāruṣyameva caajñānaṃ cābhijātasya pārtha saṃpadamāsurīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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