महाभारत 6.39.18
सत्कारमानपूजार्थं तपो दम्भेन चैव यत्क्रियते तदिह प्रोक्तं राजसं चलमध्रुवम्
satkāramānapūjārthaṃ tapo dambhena caiva yatkriyate tadiha proktaṃ rājasaṃ calamadhruvam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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