महाभारत 6.39.4
यजन्ते सात्त्विका देवान्यक्षरक्षांसि राजसाःप्रेतान्भूतगणांश्चान्ये यजन्ते तामसा जनाः
yajante sāttvikā devānyakṣarakṣāṃsi rājasāḥpretānbhūtagaṇāṃścānye yajante tāmasā janāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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