महाभारत 6.4.5
कालोऽयं पुत्ररूपेण तव जातो विशां पतेन वधः पूज्यते वेदे हितं नैतत्कथंचन
kālo'yaṃ putrarūpeṇa tava jāto viśāṃ patena vadhaḥ pūjyate vede hitaṃ naitatkathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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