महाभारत 6.40.11
न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतःयस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते
na hi dehabhṛtā śakyaṃ tyaktuṃ karmāṇyaśeṣataḥyastu karmaphalatyāgī sa tyāgītyabhidhīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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