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महाभारत 6.40.26
मुक्तसङ्गोऽनहंवादी धृत्युत्साहसमन्वितःसिद्ध्यसिद्ध्योर्निर्विकारः कर्ता सात्त्विक उच्यते
muktasaṅgo'nahaṃvādī dhṛtyutsāhasamanvitaḥsiddhyasiddhyornirvikāraḥ kartā sāttvika ucyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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