महाभारत 6.40.3
त्याज्यं दोषवदित्येके कर्म प्राहुर्मनीषिणःयज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यमिति चापरे
tyājyaṃ doṣavadityeke karma prāhurmanīṣiṇaḥyajñadānatapaḥkarma na tyājyamiti cāpare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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